अलकनंदा नदी गंगा की सहयोगी नदी है, जो, की गंगा के चार नामों में से एक है| अलकनंदा नदी का उद्गम स्थान सतोपंथ हिमनंद है| अलकनंदा सतोपंथ से निकल कर बद्रीनाथ के किनारे से होते हुए २२९ किमी० की दुरी तय करती है| अलकनंदा नदी गढ़वाल हिमालय की प्रमुख नदी है| अलकनंदा नदी की औसत गहराई ७ फुट है| अलकनंदा अपने मै कई नदियों और गदेरों से संगम करती हुए बढती जाती है| अलकनंदा नदी पर कई नदियों का संगम और प्रयाग है| जिनमें से प्रमुख पांच प्रयाग हैं|. १- विष्णो प्रयाग-जोशीमठ से १० किमि० पीछे अलकनंदा नदी धोली नदी का सगम है] जो की विष्णो प्रयाग के नाम से जाना जाता है|
२- नन्दप्रयाग-नन्दप्रयाग मैं अलकनंदा नदी से नंदाकिनी नदी मिलती है| जिसे नन्द प्रयाग नाम से जाना जाता है|
३- कर्णप्रयाग| कर्णप्रयाग मैं अलकनंदा नदी पिंडर नदी से मिलती है] जो की कर्णप्रयाग नाम से जाना जाता हैं|
४- रुद्रप्रयाग- रुद्रप्रयाग मै अलकनंदा नदी मै मन्दाकिनी का संगम होता है तब उसे रुद्रप्रयाग कहा जाता है|
५- देवप्रयाग-देवप्रयाग मैं अलकनंदा से भागीरथी मिलती है] तब उसे देवप्रयाग कहा जाता है|
देवप्रयाग से आगे अलकनंदा को गंगा के नाम से जाना जाता है| जो की मोक्षदायिनी है| जिसका आकार विशाल है|
२- नन्दप्रयाग-नन्दप्रयाग मैं अलकनंदा नदी से नंदाकिनी नदी मिलती है| जिसे नन्द प्रयाग नाम से जाना जाता है|
३- कर्णप्रयाग| कर्णप्रयाग मैं अलकनंदा नदी पिंडर नदी से मिलती है] जो की कर्णप्रयाग नाम से जाना जाता हैं|
४- रुद्रप्रयाग- रुद्रप्रयाग मै अलकनंदा नदी मै मन्दाकिनी का संगम होता है तब उसे रुद्रप्रयाग कहा जाता है|
५- देवप्रयाग-देवप्रयाग मैं अलकनंदा से भागीरथी मिलती है] तब उसे देवप्रयाग कहा जाता है|
देवप्रयाग से आगे अलकनंदा को गंगा के नाम से जाना जाता है| जो की मोक्षदायिनी है| जिसका आकार विशाल है|



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