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Sunday, February 25, 2018

Indian numbers

भारतीय गणना Indian numbers

१० दस ten
१०० सौ Hundered
१००० एक हजार Thousands
१०००० दस हजार Ten Thousands
१००००० एक लाख Lakh
१०००००० दस लाख Ten Lakh
१००००००० एक करोड़ Crore
१०००००००० दस करोड़ Ten Crore
१००००००००० एक अरब arab (billion)
१०००००००००० दस अरब Ten Arab
१००००००००००० खरब Trillion
१०००००००००००० दस खरब\Ten Trillion
१००००००००००००० नील Nile
१०००००००००००००० दस  नील Ten Nile
१००००००००००००००० पदम् Padam
१०००००००००००००००० महा पदम् Maha Padam 
१००००००००००००००००० शंख ConCh
१०००००००००००००००००० महा शंख Maha Conch
१००००००००००००००००००० अंत्या Antya
१०००००००००००००००००००० महा अंत्या Maha Antya
१००००००००००००००००००००० मध्य  Madhya
१०००००००००००००००००००००० महा मध्य Maha Madhya
१००००००००००००००००००००००० पारध pardh
१०००००००००००००००००००००००० महा पारध Maha Pardh
१००००००००००००००००००००००००० धून Dhoon
१०००००००००००००००००००००००००० महा धून Maha Dhoon
१००००००००००००००००००००००००००० अशोहिनी Ashohini
१०००००००००००००००००००००००००००० महा अशोहिनी Maha Ashohini

There is special significance in disst. Chamoli tourist and spirituality

जनपद चमोली का पर्यटन और अध्यात्म मैं विशेष स्थान है। जहां एक और भारत के चार धाम मैं से एक बद्री धाम है। जहाँ पर आदि गुरु शंकराचार्य जी ने बद्रीनाथ मैं भगवान विष्णु जी की मूर्ति स्थापित की है, वहीं जोशीमठ मैं ज्योतिर्मठ की स्थापना कर धर्म और आस्ता को नया आयाम दिया है। जनपद चमोली मैं पर्यटन की दृष्टि से औली, जोशीमठ, गोपेश्वर, सतोपंत, फूलों की घाटी, हेमकुण्ड साहिब, रामणी, वाण, नंदा देवी यात्रा मार्ग और गौचर मेला आदि अनेकों स्थान और धार्मिक स्थानों के कारण जनपद चमोली का पर्यटन और अध्यात्म मैं विशेष स्थान और महत्व है।



In the shadow of future disasters

भविष्य आपदाओं के साये मैं

आपदा

आपदा एक प्राकृतिक या मानव निर्मित जोखिम का प्रभाव है जो समाज और प्रयार्वरण को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है  आपदा एक असामान्य घटना है जो थोड़े ही समय के लिए आती है और अपने विनाश  के चिन्ह लम्बे समय के लिए छोड़ जाती है| मनुष्य का भविष्य आपदाओं से घिरा हुआ हैतथा मानव भविष्य आपदा के सायें मैं जीने को विवस है|भविष्य मैं निम्न प्रकार के आपदा आने की संभावनाएं प्रकट हो रही है|
- अत्यधिक जनसँख्या:- बर्तमान समय मैं दुनिया की जनसंख्याँ बहुताहित तेजी से बड रही है| जिसमें की एशियाई देशों का बड़ा योगदान दिख रहा है| अधिक जनसँख्या के बड़ने पर क्षेत्रफल घनत्व भी बड़ेगा| 
परमाणु युद्ध :- वर्तमान समय में  ताकत का सूचक है परमाणु हतियार, किन्तु  यदि कभी भी परमाणु युद्ध  हुआ तो आप समझ सकते हैं  क्या  हसल  होगा दुनिया का?
३- ग्लोबल वार्मिंग :-  पर्यावरण के बदले शुर से कोई भी अनजाना नही है  जिससे हमारे पर्यावरण पर  निम्न  प्रकार से खतरा मंडरा रहा है|
अ- अतिवर्षा- ग्लोबल वार्मिंग के कारण कभी कम वर्षा तो कभी अति वर्षा हो सकती है| पानी बिना हमारा  जीवन संभव ही नहीं हैं|
ब- ओलावृष्टी- ओलावृष्टी होने से हमारी सारी फसल ख़राब हो जाएगी, जो की बिलकुल भी सही नहीं है|
स- सूखा:- ग्लोबल वार्मिंग से सूखा पड़ने के आसार तो अभी से दिख रहे हैयदि सूखा पड़ा तो पानी नहीं होगा| फसल नहीं उग पायेगी तो खायेंगे क्या|
द- लू :- ग्लोबल वार्मिंग के  कारण भविष्य मै लू (मौसम मैं अधिकाधिक गर्मी का बढना ) से भी बड़ा दुष्प्रभाव पड़ेगा|
य- अनुपयोगी गैस :- ग्लोबल वार्मिंग के कारण वातावरण मै बहुत से अनुपयोगी गैसों का प्रभाव पड़ेगा, जो की खतरनाक होगा|
व- हिम युग :- ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम मैं हो रहे बदलाव से भविष्य मै हिम युग आने की असंका हैं|
  जो की बिलकुल उचित नहीं होगा|
र- जल संकट :- ग्लोबल वार्मिंग से हमारी दुनिया मैं जल संकट का खतरा मंडरा रहा है | बहुत से बेज्ञानिकों का मानना है की अगला विश्व युद्ध पानी के लिए हो सकता है|
४- सभ्यता की समाप्ति :- यदि दुनिया मैं कोई भी सभ्यता नही होगी तो मानव मूल्यों का ह्रास होगाऔर सभ्यता के पुनः निर्माण या नयीं सभ्यता बनाने पर बहुत समय व्यर्थ होगा| तथा प्रत्येक शब्द की नई परीभाषा बनानी होगी|
५- सुनामी और भूकम्प :- भविष्य मैं सुनामी और भूकम्प आटा हैं तो उसके परिणाम शुभ  नहीं होंगे|
६- आतंकबाद :- दुनिया मैं सबसे बड़ी समस्या हैं आतंकबाद का, यदि इस विषय के बारे मै अभी नही कुछ किया गया तो भविष्य मैं इसके शुकद परिणाम नही दिख रहे|
निष्कर्ष :- आपदा चाहे कोई भी हो उसका परिणाम शुभ नहीं होता है| किन्तु इससे बचाव किया जाना नित्यांत आवश्यक हैग्लोबल वार्मिंग से बचने का सबसे आसन तरीका यही है की ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण किया जाय| इस सम्बन्ध मै हमारी सरकारों को भी ठोस कदम उठाने होंगेजैसे की हिंदुस्तान के प्रत्येक व्यक्ति को प्रति वर्ष २ पेड़ लगाने होंगेतथा उन पेड़ों की देख-रेख करनी होगी| तथा पानी के श्रोतों के पास उतीस के पेड़ रोपित करने होंगे जिससे श्रोते का पानी सूख न जाय| उतीस जमीन से पानी को बहुत सोकता है| तथा जिंतना पेड़ को चाहिए उतना की पानी प्रयोग कर शेष पानी छोड़ देता हैं|



History of Indian Rupees

History of Indian Rupees भारतीय रुपये का इतिहास Ancient indian currency

Ancient indian currency
History of Indian Rupees
भारतीय रुपये का इतिहास

*  फूटी कौड़ी          से        कौड़ी
*  कौड़ी                 से         दमड़ी
*  दमड़ी                से         धेला
*  धेला                   से         पाई
*  पाई                   से         पैंसा
*  पैंसा                  से          आना
*  आना                से           रुपया बना

{ २५६ दमड़ी = १९२ पाई = १२८ धेला = ६४ पैंसा (पुराना) =१६ आना = १ रुपया }

१)  ३ फूटी कोड़ी       =      १ कौड़ी
२)  १० कौड़ी             =      १ दमड़ी
३)  २ दमड़ी             =       १ धेला
४)  १.५ पाई             =        १ धेला
५)  ३ पाई                =         १ पैंसा (पुराना)
६)  ४ पैंसे                =          १ आना
७)  १६  आना          =          १ रुपया 




Alaknanda River life effect

अलकनंदा नदी गंगा की सहयोगी नदी है, जो, की गंगा के चार नामों में से एक है| अलकनंदा नदी का उद्गम स्थान सतोपंथ हिमनंद है|  अलकनंदा सतोपंथ से निकल कर बद्रीनाथ के किनारे से होते हुए २२९ किमी० की दुरी तय करती है| अलकनंदा नदी गढ़वाल हिमालय की प्रमुख नदी हैअलकनंदा नदी की औसत गहराई ७ फुट है| अलकनंदा अपने मै कई नदियों और गदेरों से संगम करती हुए बढती जाती है| अलकनंदा नदी पर कई नदियों का संगम और प्रयाग हैजिनमें से प्रमुख पांच प्रयाग हैं|.                               १- विष्णो प्रयाग-जोशीमठ से १० किमि० पीछे अलकनंदा नदी धोली नदी का सगम है] जो की विष्णो प्रयाग के नाम से जाना जाता है|
२- नन्दप्रयाग-नन्दप्रयाग मैं अलकनंदा नदी से नंदाकिनी नदी मिलती है| जिसे नन्द प्रयाग नाम से जाना जाता है|
३- कर्णप्रयाग| कर्णप्रयाग मैं अलकनंदा नदी पिंडर नदी से मिलती है] जो की कर्णप्रयाग नाम से जाना जाता हैं| 
 ४- रुद्रप्रयाग- रुद्रप्रयाग मै अलकनंदा नदी मै मन्दाकिनी का संगम होता है तब उसे रुद्रप्रयाग कहा जाता है|
५- देवप्रयाग-देवप्रयाग मैं अलकनंदा से भागीरथी मिलती है] तब उसे देवप्रयाग कहा जाता है|
     देवप्रयाग से आगे अलकनंदा को गंगा के नाम से जाना जाता है| जो की मोक्षदायिनी है| जिसका आकार विशाल है|










समा है सुहाना सुहाना, नशे में जहां है

  समा है सुहाना सुहाना, नशे में जहां है किसीको किसीकी खबर ही कहाँ है हर दिल में देखो मोहब्बत जवां है कह रही है नजर, नजर से अफसाने हो रहा है ...